Tribute to our Heroes
हम सब बहुत परेशान हो रहें हैं न....बाहर जो नहीं निकल पा रहे...क्यूंकि इस एक बीमारी ने हमें घर में बंद कर दिया।
एक बार जरा उनके बारे में भी सोचिए जो कल भी आपके लिए बाहर थे और आज इस भयंकर महामारी में जहां दुनिया घर में बंद है, वहीं वो ईमानदारी से अपना फ़र्ज़ पूरा कर रहे हैं।
हम सब पहले भी इससे कई बड़ी लड़ाईयां लड़ चुके हैं और जीते भी हैं और इसलिए भी जीते हैं क्यूंकि आप और हम जैसे लोग देश के साथ खड़े रहे हैं।
आज हमारे देश में इस अदृश्य मुसीबत ने कब्ज़ा कर लिया है सारे डॉक्टर्स, पुलिस, सफाई कर्मचारी सब अपना अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभा रहे हैं।
और एक हम हैं जिन्हें घर से बाहर निकल कर घूमने की जल्दी है।
हां, इससे गरीब लोगों को बहुत फर्क पड़ा हैं...भूख ने उन्हें मजबूर कर दिया है लेकिन वो गरीब भी देश के इस संकट के समय में साथ खड़ा है।
हमारे आपकी तरह उन डॉक्टर्स और पुलिस कर्मचारियों के भी परिवार है, उनके परिवार वालों को भी ठीक उसी तरह चिंता रहती है दिन रात जैसे आपके घर वालों को....
अगर कहीं बाहर निकलना हुआ तो जैसे आपकी मां कहती है न... मास्क लगाया या नहीं, हाथ sanitize किया या नहीं, किसी को छूना मत ,दूरी बनाए रखना।
ठीक वैसे ही इन डॉक्टर्स और पुलिस वालों के परिवार को भी चिंता होती है।
ये घर के अंदर भी इस डर से नहीं जाते की कहीं इनका परिवार खतरे में न आ जाए, बच्चे दो साल का है उस पर प्यार आता है लेकिन गोद में नहीं उठाते। घर के बाहर ही खाना खा लेते हैं।
उसी घर की देहरी को पार करने में डरते हैं।
लेकिन फिर भी वो अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हट रहे..तो हम इतना क्यूं परेशान हैं। अगर कुछ दिन घर पर रहने से देश का भला होता है तो शायद इससे बड़ी देशभक्ति कुछ नहीं हो सकती।
भगत सिंह और आज़ाद को तो फिर भी जान देना पड़ा था, हमें तो इतना भी नहीं करना है। बस कुछ दिन घर पर रहना है और शुक्रिया अदा करना है हर उस शख्स का जो इस संकट के समय में हमारी सुरक्षा के लिए अपनी जान खतरे में डाल रहा है।
ऊपर वाले का शुक्रिया करिए कि आपको इस भारत देश में जनम मिला है और शुक्रिया करिए उनका भी जो आपको हर मुसीबतों से बचाते आए हैं।
-Ankit Tripathi
Bilkul sahi kaha
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