शामिल कर दिया।

मुझे भी ग़ज़ल की दुनिया में शामिल कर दिया,
तेरे इक नाम ने मत'अला मुकम्मल कर दिया।

ये शेर-ओ-शायरी कभी हमारे बस की नहीं थी,
तेरी रूह ने हमें भी इसके काबिल कर दिया।

अक्स आंखों से ओझल हो जाए तो न डरना,
मेरे जिस्म ने इसके होने से ख़ारिज कर दिया।

दुनिया बागबानी करती रही है हर रिश्तों की,
इसकी रस्मों ने अपनों को ज़ाहिल कर दिया।

मेरे दोस्त यह आंसू बहुत संभाल कर रखना,
इन बूंदों ने कई रिश्तों को कामिल कर दिया।


🖋️ Ankit Tripathi

Instagram/Twitter/Tiktok: ankittripathi.official

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