मेरे इश्क़ में पागल लड़की।।
जिसकी खातिर मैंने अब तक खुद को तारी रखा है
यूं रात रात अपनी ग़ज़लों में धड़कन जारी रखा है,
जो मेरी याद में रातों को बिन खाए सो जाती थी
जो बैठे बैठे मेरे सामने यूं मुझमें ही खो जाती थी,
कहीं उसे दुआ में कहता कहीं मांग तारों से भरता,
कहीं रात में उसकी खातिर जगके आंखे तर करता
क्या वो अब भी खुश होगी मुस्काती हुई जहां होगी,
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
एक दफा जब उसके लिए मैंने ग़ज़लों में प्यार लिखा
दिल के कोरे कागज़ पर कई शब्दों का अंबार लिखा,
लिखा था मैंने तेरे लिए अब शायर बन के उभरा हूं
तुझपे इतना लिख पाया जब कई दुखों से गुज़रा हूं,
तुम पढ़ना मेरी नज्मों को जब तुम कभी अकेले होगे
बाहर बाहर होगी खामोशी अन्दर शोरों के मेले होंगे,
जिस कमरे में मुझसे बाते की शायद आज वहां होगी,
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
तेरे हरेक दुख दर्द को मैंने खुद पर कभी सहा था
जब तेरा ख्याल रखूंगा हमेशा माथा चूम कहा था,
जब तूने पहली दफा मुझे अपने घर पे बुलाया था
जब मेरी दी हुई अंगूठी को तूने पहन दिखाया था,
याद है तुझे तेरी दी हुई शर्ट अभीतक पास है मेरे
जिसके रेशे रेशे में अबतक जिंदा एहसास हैं तेरे,
जो मेरे बिन न रहती थी वो जाने आज कहां होगी,
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।
जब गुलाब की छोटी कलियां हर बागों में फूली थी
जब तू अपने कानों की बाली मेरे कमरे में भूली थी,
मेरे प्रश्नों का उत्तर होता था सहज भाव चेहरा तेरा
लेकिन हर एक सहजता में लगता है पहरा गहरा,
ये दिन बीते और इश्क़ की प्यारी प्यारी बात टली
उसके घर में आखिर उसकी शादी की बात चली,
हो गई विवश बिना कुछ बोले रोती हुई रही होगी
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
उसने फोन किया मुझको की लड़के वाले आए हैं
मुझसे घरवाले कहते है वो सब मुझे देखने आए,
तुम बिल्कुल कभी नहीं रोना तुमको मेरी कसमें है
ये शादी-वादी फेरे-विदाई सब दुनिया की रस्में हैं,
तेरा इतना कहना कि यह अंतिम साथ हमारा है
कम ही सही लेकिन हमने अच्छा वक्त गुजारा है,
जो एक दिन न रही दूर वो ये दूरी कैसे सही होगी
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
जहां तू होगी खुश ही होगी मैंने ऐसा सोच रखा है
कई दिनों से अपने आंसू को आंखों में रोक रखा है,
मै तो एक मुसाफिर ठहरा तू समाज की मारी थी
हम दोनों के किस्से में कुछ सामाजिक लाचारी थी,
तुझे विदा किया है मैंने एक अरसे तक रो रो कर
हंसता था अपने चेहरे को मैं अश्कों से धो धो कर,
इस दुनियादारी के बंधन से जाने कभी रिहा होगी
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
-Ankit Tripathi
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Twitter: ankittripathi.official
Tiktok: ankittripathi.official
यूं रात रात अपनी ग़ज़लों में धड़कन जारी रखा है,
जो मेरी याद में रातों को बिन खाए सो जाती थी
जो बैठे बैठे मेरे सामने यूं मुझमें ही खो जाती थी,
कहीं उसे दुआ में कहता कहीं मांग तारों से भरता,
कहीं रात में उसकी खातिर जगके आंखे तर करता
क्या वो अब भी खुश होगी मुस्काती हुई जहां होगी,
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
एक दफा जब उसके लिए मैंने ग़ज़लों में प्यार लिखा
दिल के कोरे कागज़ पर कई शब्दों का अंबार लिखा,
लिखा था मैंने तेरे लिए अब शायर बन के उभरा हूं
तुझपे इतना लिख पाया जब कई दुखों से गुज़रा हूं,
तुम पढ़ना मेरी नज्मों को जब तुम कभी अकेले होगे
बाहर बाहर होगी खामोशी अन्दर शोरों के मेले होंगे,
जिस कमरे में मुझसे बाते की शायद आज वहां होगी,
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
तेरे हरेक दुख दर्द को मैंने खुद पर कभी सहा था
जब तेरा ख्याल रखूंगा हमेशा माथा चूम कहा था,
जब तूने पहली दफा मुझे अपने घर पे बुलाया था
जब मेरी दी हुई अंगूठी को तूने पहन दिखाया था,
याद है तुझे तेरी दी हुई शर्ट अभीतक पास है मेरे
जिसके रेशे रेशे में अबतक जिंदा एहसास हैं तेरे,
जो मेरे बिन न रहती थी वो जाने आज कहां होगी,
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।
जब गुलाब की छोटी कलियां हर बागों में फूली थी
जब तू अपने कानों की बाली मेरे कमरे में भूली थी,
मेरे प्रश्नों का उत्तर होता था सहज भाव चेहरा तेरा
लेकिन हर एक सहजता में लगता है पहरा गहरा,
ये दिन बीते और इश्क़ की प्यारी प्यारी बात टली
उसके घर में आखिर उसकी शादी की बात चली,
हो गई विवश बिना कुछ बोले रोती हुई रही होगी
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
उसने फोन किया मुझको की लड़के वाले आए हैं
मुझसे घरवाले कहते है वो सब मुझे देखने आए,
तुम बिल्कुल कभी नहीं रोना तुमको मेरी कसमें है
ये शादी-वादी फेरे-विदाई सब दुनिया की रस्में हैं,
तेरा इतना कहना कि यह अंतिम साथ हमारा है
कम ही सही लेकिन हमने अच्छा वक्त गुजारा है,
जो एक दिन न रही दूर वो ये दूरी कैसे सही होगी
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
जहां तू होगी खुश ही होगी मैंने ऐसा सोच रखा है
कई दिनों से अपने आंसू को आंखों में रोक रखा है,
मै तो एक मुसाफिर ठहरा तू समाज की मारी थी
हम दोनों के किस्से में कुछ सामाजिक लाचारी थी,
तुझे विदा किया है मैंने एक अरसे तक रो रो कर
हंसता था अपने चेहरे को मैं अश्कों से धो धो कर,
इस दुनियादारी के बंधन से जाने कभी रिहा होगी
मेरे इश्क़ में पागल लड़की जाने आज कहां होगी।।
-Ankit Tripathi
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